sajal sardha

जय गुरु देव

GAYATRI MAA

ॐ सूर्या नम:

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Welcome To Gayatri Saktipeeth Ranchi,Jharkhand.

अखिल विश्व गायत्री परिवार, गायत्री शक्तिपीठ रांची, (झारखण्ड)

गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर-2 धुर्वा रांची में गायत्री माता का प्राण प्रतिष्ठा परम पूज्य गुरु देव के कर कमलो द्वारा 01/अप्रैल /1981 को सम्पन कराया गया था I इसकी सुवयावस्था के लिए गायत्री परिवार ट्रस्ट का गठन किया गया था I इस के मुख प्रबंध ट्रस्टी श्री विरेन्द्र सिंह, बिरसा नगर कॉलोनी, हटिया रांची थे I बाद में इस केंद्र की व्यवस्था के लिए श्री वेद माता गायत्री ट्रस्ट शान्तिकुंज हरिद्वार ने अपने अधीन ले लिया I तब से झारखण्ड प्रान्त का एकलोता केंद्र है जो श्री वेद माता गायत्री ट्रस्ट के प्रत्यक्ष मार्ग दर्शन में संचालित है I यहाँ नियमित रूप से जरुरत के हिसाब से 8/10 समय दानी कार्य कर्ता/ परिव्राजको की प्रति नियुक्ति शान्तिकुंज के द्वारा छ : माह से एक वर्ष तक के लिए की जाती है I झारखण्ड प्रान्त के सात उप जोन में से एक उप जोन रांची है I रांची उप जोन की गतिविधियों का संचालन गायत्री शक्तिपीठ उप जोन कार्यालय सेक्टर-2 धुर्वा रांची के द्वारा हुआ करता है I आज के तारीख में आदरणीय शैल दीदी के पत्र के द्वारा रांची केंद्र को ज़ोन कार्यालय घोषित कर दिया गया (पत्र संलगन ) I इस का लोकार्पण चैत्र शुक्ल पक्ष षष्टीतिथि विक्रम संवत 2080 ,तदनुसार दिनाक -27/03/2023 आदरणीय श्री वीरेन्द्र तिवारी जी पूर्वी जोन समन्वयक शान्तिकुंज हरिद्वार के द्वारासम्पन्न हुआ जिसमे झारखण्ड प्रान्त के सारे उप जोन के कार्यकर्तागण पधारे थे I वर्त्तमान में जोन प्रभारी श्री राम नरेश प्रसाद जी हैं I जोन समन्वयक –आदरणीय राम नरेश प्रसाद /उप जोन समन्वयक –श्री शारदा प्रसाद /श्री राज किशोर विश्वकर्मा जी /व्यवस्थापक–श्री जटा शंकर झा जी एव रांची जिला संयोजक श्री के के मिश्रा जी यहाँ की गतिविधियों का संचालन शान्तिकुंज के मार्गदर्शन में कुशलता पूर्वक सम्पन्न कर रहे हैं I वर्त्तमान में यहाँ पांच समय दानी कार्यकर्ता की प्रतिनियुक्ति शान्तिकुंज के द्वारा की गई है I 21/03/2023 को परम पूज्य गुरुदेव के चित्र प्रदर्शनी एव पुस्तकालय सह वाचनालय का लोकार्पण आदरणीय संदीप पांडे जी के कर कमलो द्वारा हुआ I


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शान्तिकुञ्ज आश्रम हरिद्वार

हरिद्वार के सप्त सरोवर क्षेत्र में ऋषिकेश रोड पर स्टेशन से ६ कि.मी. दूर महर्षि विश्वामित्र की तपःस्थली पर युगऋषि परम पूज्य आचार्य पं.श्रीराम शर्मा एवं वंदनीया भगवती देवी शर्मा की प्रचण्ड तप-साधना से अनुप्राणित विशाल, दर्शनीय, जीवंत तीर्थ।
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ब्रह्मवर्चस शोधसंस्थान

ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान के विषय निम्नलिखित हैं- १. ध्यान के द्वारा आधि (मानसिक रोग), व्याधि (शारीरिक रोग) निवारण । २. आसन- प्राणायाम, बंध,मुद्रा आदि से शरीर के गुह्य- प्रसुप्त केंद्रों का जागरण । ३ .सोऽहम् साधना, अनाहत नाद का सूक्ष्म स्वर विज्ञान ।
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देव संस्कृति विश्वविद्यालय

ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान । वहाँ एक शैक्षिक संस्थान है, जो महान और प्रबुद्ध मनुष्य में अपने छात्रों को ढाल लेना सकता है; , निस्वार्थ गरम-- दिल, करुणामय और दयालु। -- युग ऋषि पं। श्रीराम
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गायत्री तपोभूमि , मथुरा

परमपूज्य गुरुदेव की चौबीस महापुरश्चरणों की पूर्णाहुति पर की गई स्थापना माना जा सकता है, जिसे विनिर्मित ही गायत्री परिवार रूपी संगठन के विस्तार के लिए किया गया था । इसकी स्थापना से पूर्व चौबीस सौ तीर्थों के जल व रज को .....
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अखण्ड ज्योति संस्थान

अखण्ड ज्योति संस्थान, घीयामण्डी, मथुरा में स्थित है । परमपूज्य गुरुदेव सीमित साधनों में अपने अखण्ड दीपक के साथ आगरा से आकर यहीं रहने लगे । यहीं से क्रमश: आत्मीयता विस्तार की जन- जन तक अपने क्रांतिकारी चिंतन के विस्तार की प्रक्रिया .......
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आँवलखेड़ा

युगतीर्थ आँवलखेड़ा युगतीर्थ आँवलखेड़ा, आगरा जिले का जलेसर रोड पर स्थित छोटा सा गांव है, जहाँ आश्विन कृष्णा त्रयोदशी संवत् १९६८ (२० सितंबर ११११) को युग पुरुष पं० श्रीराम शर्मा ने जन्म लिया । एक श्रीमंत ब्राह्मण परिवार जहाँ धन की कोई कमी नहीं थी,
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Tools for Empowerment

गायत्री परिवार

शक्ति पीठ का इतिहास

गायत्री उपासना

संस्थापक/संरक्षक

गायत्री यज्ञ

गायत्री मन्त्र

गायत्री चालीसा

गायत्री माता की आरती

युग निर्माण सत्संकल्प

प्रज्ञा पुराण

चन्द्रायण व्रत

पदयात्रा

Catalyst of Change

iPhone

सतयुग की वापसी

विचार क्रांति

सतयुग की वापसी संवेदना के जागरण, करुणा के उभार से होगी। बस एक ही विकल्प इन दिनों है— भाव- संवेदना का जागरण।

शांतिकुंज

नए युग की मॉडल

प्रचण्ड तप-साधना से अनुप्राणित विशाल, दर्शनीय, जीवंत गायत्री तीर्थ ।शान्तिकुञ्ज व्यक्तित्व गढ़ने की टकसाल है।

बुद्धिमता के साथ शिक्षा

शिक्षा और विद्या

एक अनूठा मनुष्य बनाने का विश्वविद्यालय– डी.स.वि .वि बाल संस्कार शाला बीएसजीपी - सभी विद्यालय के छात्रों के लिए एक जागरूकता केंद्र

समाज निर्माण

समाज में गुणात्मक परिवर्तन के लिए

"रूरल मैनेजमेंट"आत्मनिर्भर प्रशिक्षण, आपदा प्रबंधन, नशा मुक्ति, बुराई सीमा शुल्क आदि उन्मूलन ..

जीवन को बदलने का साहित्य

3200 पुस्तकें एक व्यक्ति द्वारा

वेदमूर्ति, तपोनिष्ठा पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने लिखा है- क्रांतिकारी पुस्तकों से अपने जीवन में परिवर्तन लाना होगा।

शुद्ध वातावरण

सूक्ष्म और सकल उपाय :

अश्वमेध यज्ञ -सूक्ष्म पर्यावरण को स्वच्छ करने के लिए, निर्मल गंगा व जल संरक्षण आंदोलन, वृक्ष गंगा - मेगा वृक्षारोपण

साहित्य

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सुनिये अमृतवाणी

प्रज्ञा रेडियो

संरक्षक संस्थापक

एक सन्त, युगपुरुष, दृष्टा, सुधारक आचार्य श्रीराम शर्मा जिन्होने युग निर्माण योजना आन्दोलन का सूत्रपात किया। जिन्होने तपस्या का अनुशासित जीवन जीते हुए आध्यात्मिक श्रेष्ठता प्राप्त कर समस्त मानवता को प्रेरित किया । जिन्होने बदलते समय के अनुसार हमारे दृष्टिकोण को, विचारों को, संवेदनशीलता का विस्तार करने के लिये, जीवन को बदलने के लिये सत्साहित्य का सृजन किया ।
परम पूज्य गुरुदेव एक ऐसे साधक, द्रष्टा, विचारक रहे हैं, जिनको व्यक्ति, परिवार, समाज और देश-विदेश में घट रही अथवा घटने वाली घटनाओं की तह में जाकर उन्हें आर-पार देखने की अलौकिक सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त थी। जो दृश्य-अदृश्य जगत् की विविध परिस्थितियों को निमिष मात्र में भाँपकर उन्हें नियन्त्रित कर लेते थे।


संरक्षक संस्थापक

वास्तव में दुर्लभ और व्यावहारिक लेखन गायत्री मंत्र, साधना और यज्ञ विज्ञान पर

अद्वितीय आंदोलनविचार क्रांति के पहले ही मुद्दे के साथ "अखण्ड ज्योति " 1939 में पहली पुस्तक में उन्होंने लिखा था "में क्या हूँ ? ", वास्तविक में एक उपनिषद स्तर के काम आत्म के ज्ञान पर ।
पूरा ग्रंथ, हिन्दी, पूरे वैदिक इंजील (वेद, उपनिषद, दर्शन , पुराण और स्मृति की )

प्रमुख पुस्तकालयों द्वारा मान्यता : इन्क्लूडिंग आई .आई.टी मुम्बई , स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेनसिलवेनिया , सिडनी यूनिवर्सिटी ,वेस्टर्न रेलवे हिंदी डिवीज़न -मुम्बई , भंडारकर ओरिएण्टल रिसर्च इंस्टिट्यूट -पुणे

महत्वपूर्ण पुस्तकें

1. मरने के बाद हमारा क्या होता है ?
2. महाकाल और युग प्रत्यावर्तन प्रक्रिया
3. सुनसान के सहचर
4. मै क्या हूँ ?
5. गायत्री महाविज्ञान
6. महमारी वसीयत और विरासत

ऋषि परंपरा को फिर से जीवित

वैदिक ऋषि के जीवन को बदलने परंपराओं यहाँ पुनर्जीवित कर रहे हैं।

दिव्य वातावरण

सतत गायत्री १मंत्र हजारों लोगों ने १९२६ .रोजाना यज्ञ के बाद अखंड दीपक के साथ जप सुबह घंटे में एक यादगार दृष्टि प्रस्तुत करते हैं।

अनुसंधान पर वैज्ञानिक अध्यात्म

गायत्री मंत्र और यज्ञ के वैज्ञानिक प्रभावों पर उच्च स्तर के अनुसंधान।

शिविर /शांतिकुंज में प्रशिक्षण

आध्यात्मिक विकास के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन ऑन लाइन-आवेदन

सांस्कारिक संस्कार

अंतर्निहित प्रवृत्तियों की शुद्धि प्रदर्शन किया और शांतिकुंज में वैज्ञानिक रूप से समझाया।

आध्यात्मिक मार्गदर्शन

आध्यात्मिक विकास और आत्म शोधन.संदर्भ लें पूछे जाने वाले प्रश्न के लिए व्यक्तिगत मार्गदर्शन

अखण्ड ज्योति -पत्रिकानए युग की सन्देश वाहिका, एक विचार धारा, प्रचण्ड प्राण प्रवाह, विज्ञान अध्यात्म का अद्भुत मिलनयुगऋषि की आत्मिक अनुभूतियाँ


युवा आंदोलनDIYA - डिवाइन इंडिया यूथ अस्सोसिएशन्स युवा और कंपनियों के कार्यक्रमों के लिए

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